सुधानिधि जटिल रोग चिकित्सक | Sudhanidhi Jatil Rog Chikitsank PDF in Hindi
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सुधानिधि जटिल रोग चिकित्सक | Sudhanidhi Jatil Rog Chikitsank PDF in Hindi

सुधानिधि जटिल रोग चिकित्सक | Sudhanidhi Jatil Rog Chikitsank Book PDF in Hindi Free Download

लेखक / Writerवैद्य देवीशरण गर्ग / Vaidh Devisharan Garag
पुस्तक का नाम / Name of Bookसुधानिधि जटिल रोग चिकित्सक / Sudhanidhi Jatil Rog Chikitsank
पुस्तक की भाषा / Book of Languageहिंदी / Hindi
पुस्तक का साइज़ / Book Size31.84 MB
कुल पृष्ठ / Total Pages515
श्रेणी / Category स्वास्थ्य / Health , आयुर्वेद / Ayurveda
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Sudhanidhi Jatil Rog Chikitsank PDF

सुधानिधि जटिल रोग चिकित्सक पुस्तक का एक मशीनी अंश

शिशुरोग चिकित्सांक की प्रेकाशकीय में १६७६ के विशेषांक के लिये “दृद्धरोग चिकित्सांक” की घोषणा की गयी थी परल्तु पर्याप्त विचार-विमश के बाद उक्त विशेषांक के प्रकाशन की योजना स्थगित कर दी गयी और उसके स्थान पर प्रस्तुत विशेषांक “जटिलरोग चिकित्सांक” के प्रकाशन की योजना बनाई गयी।

महिला, यहप तथा शिश्षुरोगों पर प्रथक्‌-प्रथक्‌ विस्तृत सामग्री देने के वाद ऐसे रोगों का वर्णन होना शेप था जो जीवन की सभी अवस्थाओं में सामान्य हूप से मिलते है उन सभी रोगों के सम्बन्ध में विस्तृत विचार इस विशेषांक दिया गया है। चिकित्सा में संलग्न चिकित्सकों को, चिक्रित्सा विषयक अध्ययन कर रहे आयुर्वेद विद्याधियों, आयुर्वेद अनुमन्वान में रत विद्वानों दो तथा सामान्य ज्ञान वाले आयुवद प्रेमियों को इस विशेषांक द्वारा पर्याप्त ज्ञान दी प्राप्ति होगी ।

जटिल रोगों के विपय में एक विज्ञाल विज्ेषांक निकालने का सुधानिधि का आयुर्वेद-जगत में प्रथम प्रयास है, इस विशेषांक में देश के १०० से अधिक लब्ब प्रतिष्ठित विद्वानों के लेखों का समावेश किया गया है तथा २० से अधिक विषयों पर सुधानिधि-सम्पादक आचार्य त्रिवेदी जी ने स्वयं अपनी लेखनी चलाई है। बा मात ये विरत्तर विशेषांक के वेखल में एक तबद्धी की ते हहू संलर्त आय त्िबेदी जी का अम, समुचित हप से प्रकामित करने में सुधानिधि परिवार के महस्रों “कार्यकर्त्ताओं का योग तथा हमारा विष धन व्यय तभी सार्थक होगा जब विश्षेतांक के द्रिपए में आपकी सामति से हम अबगा होगे, हो आगा है

इस विशेषांक का समुचित रूप मे अध्ययन करके हमें अयनी प्रतीक्रिया से अवश्य अवगत का. उग कि हुवे अपने प्रयास में कहां तक सफल हुए? तथा मविष्य में विवयातों को और उत्तर बनाने के लिये हमें और व्या प्रयत्न करते रहने चाहिये ?


प्रस्तत बिग्रेयांक में लेखकों को एक विष योजनान्तर्थत लेख लिखने के लिये आमन्त्रित किया गया मे तथा प्रत्येक वेखक को उमड़ी रुचि तथा अनुभव के आधार पर एक विशेष विषय निर्धारित किया गया था पिकांग लेंस इसी आधार पर इस विशेषांक में सम्राविष्ट किये गये हूँ परन्तु कुछ विपयों पर एक से अधिक तेस भरा हों जाने से अनेक लेखकों के लेख इस विश्वेपांक में ममादिष्ट नहीं किये जा गक़े इसके अतिरिक्त अमेक बैवों को उपयोगिता तथा स्थानाशाव दी ह्टि से काट-छांट कर गकामित प्रक्गि गया है।

हम उन सभी लेखकों मे क्षमाप्रार्थी 3 शिनके लेख बिशेगाक मे अफ़ाशित नहीं हो पाये है तसा आया करने है वहू हारी भावताओं पर विचार कर हमें इस हेतु क्षमा कर देंगे । उन सभी लेखों को जो प्रकाशित नहीं हए है सुधानिधि के साधारण अंकों में प्रकाशित किया जाता रहेगा ।

गत वर्षो की परणय रा के अगुमार इस वर्ष भी सुधानिधि के दो बंध विद्येपाक प्रक्राशित किये जार है। प्रथम लबु विश्ेेषात गौलाई माह मे कविराज श्री रद्रतारायणमिह के सग्पादकत्व में विप-चिकित्साक’ तथा दूसरा लघु विशेषकर अवटूबर माह में डा० तेजबहादुर चोधरी + धण्णादतत्य मे चिकित्मक अनुभयांक’ प्रदाणित किया जायेगा । सुधानिधि के पूर्व प्रकाशित लघु विशेषावर्त की तरह ये दोनों गंगु विशेधांक भी पाठकों के लिगे अत्यधिक उपयोगी प्रमाणित होंगे ऐसा हमारा पूर्ण विव्वास है।

सुधानिधि के पाठकों के ममक्ष यह घोषणा करते हुए हमें अत्यन्त प्रसानता है कि आगामी बर्षे सुधातिधि, विशेषाक परम्परा को एक तवीन दिशा प्रदान करते जा रहा है। कायनविकित्सा की सप्पुर्ण परणपरा महिलारेग, पुरुष रोग, गिश्ुरोग तथा जटिनरोग सम्बन्धी वार विशाल विश्वेपांकों के कलेयर में समाविष्ठ कर
दिये जाने के उपरब्त आयुर्वेद के अत्यक्रिया उपेक्षित अंग घल्य चिक्त्मा पर साहित्य संजोने का विचार हमारे अनक विद्वाबू गेखयों तथा गायों ने हो दिया है। देश के ॥ से अधिक सब्य प्रतिष्णि बिद्वमों के आग्रह से आगागी वर्ष “मुश्नूत चिकित्साक प्रकाशित करने का पिम्बय किया गया है । इस विशे्शक के साक्ध मे दिरतृत झूपरेसा आगामी जकों में प्रकाणित की जायेगी ।

ज्तज्ञताज्ञापन तथा निवेदन चार वर्ष के अल्प समय में अनेक संक्टों को पार करते हुए सुधानिधि ने आयुर्वेद-जगठ मे जो सम्मानित स्थान बनाया है उसमें आचार्य जिवेदी जी का निरच्तर परिश्रम, लेखकों की लेखनी का क्रृपापूर्ण नहयोग
तथा कृपालु पाठकों का असीम स्तेह ही एकम्रात्न कारण है।

सुधानिधि का प्रडाणन जिय मिशन को लेकर हमारे पिता वैद्यराज श्री देवीश्रण गर्ग द्वारा किया गया था वह उद्दग्य हम मझी के समक्ष सदैव उपस्थित रहता * है उस स्वर्गीय आत्मा के आश्वीर्वाद’से सुधानिधि उनके द्वारा दियाई गई दिया पर निरन्‍वर वृद्धि की और बढ़ता जा रहा है। हमारे कृपालु पाठक सुधाविधि को अपने परिवार का ही सदस्य मानकर बदीब ग्राहफ़ सनाकर हमारी जो महायता करते है उमके लिये हम उनके मर्देव दत्त रहते है ।

पिछले वर्ष अनेक पाठकी ने ४-३ ४.० तथा इससे भी अधिक ग्राहक बनाकर हमारी पर्मास महाग्रता की थी हम उस सभी पाठकों को बन्यताद दसा अपना परम कतेशा मानते है । जिम्होंने निःस्वार्य भाव से मेधानिधि के ग्राहक बनाकर हमारी सहायता की | उससे पुन यह आगा करते है कि इस वर्ष भी सुधानिधि के १-२ नवीन ग्राहक बनाकर वे हमारी मदायता अवब्य कसी | इस अनुरोध के साथ सुधानिवि के सभी शुभचिस्तकों तथा सहयोगियों से उनके महयोग के लिये जाभार प्रकट बरता हूं तथा भविष्य में भी उनके सहयोग की उत्तरोत्तर वृद्धि की कामना करता हुं |

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