रामचरितमानस : गोस्वामी तुलसीदास द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Ramcharitmanas : by Gosvami Tulaseedas Free Hindi PDF Book

रामचरितमानस : गोस्वामी तुलसीदास द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Ramcharitmanas : by Gosvami Tulaseedas Free Hindi PDF Book

रामचरितमानस , गोस्वामी तुलसीदास द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक , Ramcharitmanas , by Gosvami Tulaseedas Free Hindi PDF Book
लेखक / Writerगोस्वामी तुलसीदास / Gosvami Tulaseedas
Ramcharitmanas Book Languageहिंदी / Hindi
पुस्तक का साइज़ / Book Size74.92 MB
कुल पृष्ठ / Total Pages1240
श्रेणी / Categoryपौराणिक / Mythological

अयोध्यापुरी के राजा रघुकुल मणि दशरथ जी जिनका नाम वेदों में विख्यात है | वे धर्म धुरंधर , गुणों के समुद्र और ज्ञानी थे | उनके ह्रदय में विष्णु भगवान की भक्ति और बुद्धि थी | कौशल्या आदि उनकी प्यारी सब स्त्रियाँ पवित्र आचरणवाली , पति की आज्ञा में नम्रता – पूर्वक तत्पर और भगवान के चर कमलों में स्थायी प्रेम रखती थी | एक बार राजा के मन में ग्लानि हुई कि मेरे पुत्र नहीं है |

राजा तुरंत गुरु के घर गए और पाँव पकड़कर बड़ी प्रार्थना की इतने बड़े साम्राज्य का भोगनेवाला कोई नहीं , बिना पुत्र के सब व्यर्थ है यह सोच कर मन में संताप होना “ग्लानि संचारी भाव” है अपना दुःख – सुःख सब गुरूजी को सुनाया , वशिष्ठ जी ने बहुत तरह से कह कर समझाया की धीरज धरिये , आपके चार पुत्र तीनो लोक में प्रसिद्ध और भक्तों के भय को हरने वाले होंगे |

एक पुत्र की इच्क्षा से राजा गुरु के पास गये , वहाँ चार पुत्रों का वर पाना अर्थात चित – चाही बात से अधिक अर्थ सिद्ध होना ” द्वितीय प्रहर्पण ” अलंकार हैं

वशिष्ठ जी ने श्रृंगि ऋषि को बुलवाया और कल्याण के लिए पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराया | मुनि ने भक्ति सहित आहुति दी ,[ मंत्र पढ़कर द्रव्य को अग्नि में हवन करना ] अग्नि देव हाथ में हविव्यात्र लिए प्रकट हुए उन्होंने कहा – हे राजन | वशिष्ठ जी ने जो कुछ मन में विचारा है , आप का वो सम्पूर्ण कार्य सिद्ध हो गया | यह हव्यात्र ले जाकर और यथायोग्य चार भाग बनाकर रानियों को बाँट दीजिये |

गोस्वामी तुलसीदास

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पुस्तक स्रोत

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