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ज्योतिष सर्व संग्रह PDF : रामस्वरूप शर्मा द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Jyotish Sarva Sangrah PDF : by Ramswarup Sharma Free Hindi PDF Book

ज्योतिष सर्व संग्रह PDF : रामस्वरूप शर्मा द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Jyotish Sarva Sangrah PDF : by Ramswarup Sharma Free Hindi PDF Book

ज्योतिष सर्व संग्रह PDF | Jyotish Sarva Sangrah In Hindi PDF Book Free Download

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पुस्तक का नाम / Name of Bookज्योतिष सर्व संग्रह PDF / Jyotish Sarva Sangrah PDF
लेखक / Writerरामस्वरूप शर्मा / Ramswarup Sharma
पुस्तक की भाषा /  Book by Languageहिंदी / Hindi
पुस्तक का साइज़ / Book by Size5.22 MB
कुल पृष्ठ / Total Pages174
पीडीऍफ़ श्रेणी / PDF Category ज्योतिष / Astrology
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पुस्तक स्रोत

ज्योतिष सर्व संग्रह PDF | Jyotish Sarva Sangrah PDF in Hindi

ज्योतिष सर्व संग्रह PDF पुस्तक का एक मशीनी अंश

एक एक ऋतु दो महीने धत मान रहती है। जेसे मेष इप के वर्य में यानी वेशाख ज्येष्ठ में बसन्‍्त ऋतु होती है । मिथुन कक के ब्थे में यानी आपाण श्रवण में ग्रीष्ण | सिंह कन्या के सूर्य यानी भाद्रपद आश्िन में वर्षा ऋत होती है। तला इश्चिक के सय में यानी काति क, मद्नश्र में शुरद्‌ | धन मकर के झ्ुय में यानी पोष माघ में हेमन्त | कुम्भ मीनके स्ण में यानी फाल्गुण, चत्र में शिशिर | छः महीने सब उच्धराणण और ६ महीने दक्षिगायण रहता है।

उत्तरायणश हू में देबताओं का दिन होता है और दक्षिणायण में रात होती है। इसी कारण जितने शुभ काम हैं उत्तरायण छूय में अच्छे होते हैं। मण्, फाल्गुण, चेत्र, वेशाख, ज्येष्ट अपाढ़ इन छः सह्दीनों में सुय ‘उत्तरायश रहता है। और शआवशण, भाद्रपद, आश्रविम, कातिक, सद्बशिर, पूषठ इन ६ महीनों में स्ये दक्षिणायण रहता है।

ये संक्रांति के हिसाव से है सो पत्र” में लिखा रहता है। मौन की संक्राति के जब नो अश जायेगे उसी रोज से सय उत्तरा यूथ हो जाता है | और कन्या की संक्रांति के नो अश जब जाये गे उसी रोज से सूथ दक्षिणायण हो जाता है। साठ घड़ी का एक दिन होता है। कमी दिन चढ़ा हो ज्ञाता है कभी रात पड़ी हो जाती है और एक घड़ी के साठ पत्र होते हैं और ६० पल्चकी एक घड़ी होती है और एक पल के ६० विपल होते हैं ओर ६० विपल का एक पल होता है।

पल का एक मिनद होता है और २४ मिनट की एक घड़ी होती है २॥ घड़ी का एक घणश्टा और ,२४ घरटों का एक दिन रात होता है | और एक नक्षत्र के चार चरण होते हैं। यादी चार हरूफ जब किसी बालक का जन्म होता है उस रोज देखनाकि कौनसा नक्षत्र है उस नक्षत्र के चार भाग करले; जब से बह नक्षत्र शुरू हुआ हो और जब तफ़ रहेगा ।

जेंसे अश्विनी नक्षत्रमें जन्म हुआ हो तो देखो कि यह नक्षत्र ६० घड़ी भोग करताहै तो पन्द्रह पन्द्रह घड़ीकेचार चरण हुये और थो नक्षत्र ६० घड़ी से कमती घढ़ती हो तो उतनी ही घड़ियों को चार जगह बांद’,जितना बंद आधे, उतनी ही घड़ियों पल्लोंका एक चरण जाने, जोन से चरण में जन्म हो उसी चरण का अक्षर नाम में पहिले आता है इसका कुछ प्रमाण नहीं है कि एक नक्षत्र ६० ही घड़ी भोगे जो पंडित ६० घड़ी लगाते हैं उनके लगाने से राशि में फर्क आता है ।

अब : देखिये कि अश्विनी नक्षत्र में जन्म हुआ तो यह देखो कि कौन से चरण में जन्म हुआ,उसी चरण के अच्र पे नाम घरे । जेपे चू चे चौ ला अश्विनी | पहले चरण का अक्षर चू है दूसरे का चे है तीसरेका चो है और चौथेका ला है | जो चू प॑ लड़केका जन्म हो तो चुन्नी । लड़की का जन्म हो तो चुनिया | चे पे हो तो चेतराम,चेतो | चो पे चोखराज,चोलाववी । लाप लाला या लालमण,या लांलजी,यां लाली सब नक्षत्रों पे ऐसे ही नाम भरे |

ब्राह्मण के यहां मिश्र करके लिखे चत्री के यहां सिंह करके । और जिस नक्षत्र के चरण प॑ लड़के या लड़की जन्म होगा उसका वही नक्षत्र होगा | जैसे यहां चार अच्रोका एक नचत्र ले इसी प्रकार चार? अछ्रों के २८ नक्षत्र हैं उन २८ नक्त्रों के नाम आगे के पत्र में लिंखे हैं।

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