अंको में छिपा भविष्य PDF : कीरो द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Anko Me Chipa Bhavishya PDF : by Cheiro Free Hindi PDF Book

अंको में छिपा भविष्य PDF : कीरो द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक | Anko Me Chipa Bhavishya PDF : by Cheiro Free Hindi PDF Book

अंको में छिपा भविष्य PDF | Anko Me Chipa Bhavishya In Hindi PDF Book Free Download

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पुस्तक का नाम / Name of Bookअंको में छिपा भविष्य PDF / Anko Me Chipa Bhavishya PDF
लेखक / Writerकीरो / Cheiro
पुस्तक की भाषा /  Book by Languageहिंदी / Hindi
पुस्तक का साइज़ / Book by Size2 MB
कुल पृष्ठ / Total Pages182
पीडीऍफ़ श्रेणी / PDF Category
ज्योतिष / Astrology
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पुस्तक स्रो

अंको में छिपा भविष्य PDF | Anko Me Chipa Bhavishya PDF in Hindi

अंको में छिपा भविष्य PDF पुस्तक का एक मशीनी अंश

अरपन्त प्रायोन काल से ही सावव के मन में नियठि के गूढ़ रहस्यों को भेदकर अजातव भविष्य को घान सेने की साससा रही है ! उसकी इसी शातता ने ज्योतिष-दिपा को जन्म दिया। उसने प्रह्दों की बालों का सूक्ष्म अध्यपनत कर सोतिक तया मानव-यीवन में घटित होते शास्ती घटनायों पर उनके प्रभाव को छादने का प्रयास किया, हाथ मोर पांव छी रेयार्ओो से स्यक्ति के भविष्य को पढ़ने का उच्मडिंपा, शहुदों और स्वप्नों को अथे दिए। इसी कमर में उसने अनुमंद किया कि अड्ढों के सापन्याप मढ भी हमारे जीबत की बटनाओं को प्रभायित रुरते हैं ।

अकों के रहस्य भौर शक्ति को जातने का प्रयास हजाएों वर्षों पे होता रहा है, थथप्रि उसझा क्रमदद इतिट्ास अधिरू थुाता नहीं। हमाए प्राचीत मनी-पिर्यों को शक्षति का पढठा था| तत-संत्रों में उन्होंति उछझा चमत्कारी उपयोग दिया है, गिन्तु खेद की बात है कि अपनी विदा वे अपने साय ही से मए। दर्तों के अं5-घक तो अब भी मित्त जाएंगे डिन्तु उनके फस में क्या कत्पता रही है, यह दवा पाता सम्भव नहीं है।

अंक-विज्ञात को विज्ञात का रूप देने दौर उसे रुर्देजन सुलभ बनाने का शेय दरश्चिती विद्वानों को हीं है ॥ विश्दविद्यात ज्योतिषी श्ोरें इनमें एक है | सप-भग चार हजार यर्षे दुर्ब बेदोलोनिया ओऔए चाल्डिया में, मौर भारत, मिल, बूतात भाई में भी, प्रचलित भंह-दिज्ञान का यहन अध्ययद कर उन्होंने द्रति-पादित किया है कि मंढों, प्रद्दों और राशियों में एश घूढ सम्दध है। सप्ताई के झात दित भी इससे अप्रभाशित नहीं हैं, इस सम्शघ की डोर कसी अशात एफ्ति के हादों में है ओर विश्य शो ठपा मानव जीवत की घथ्नाओं में इसकी रहृस्प- धूप ठपा रदत्वपूर्त भूमिझा रहती है ॥ अंक-दिक्ान के विदापत में कौरो की शोध कर मप्रदिस स्थात है।

प्रस्तुत पुस्तक डीरो! शा ऐसा ही एश महत्वपूर्ण क्रयास है। इसमें उत्होंति देवोनोतिपत ठपा इरिश्यत ऋद-विज्ञाद के आधार पर जम-तिपि के अनुसार स्वॉस्ति के घरिड, स्वभाव, हामंता सम्मादनार्जों, स्वास्थ्य दवा महत्वपूर्ण घटनाओं को निरूपित किया है। ज्योतिष में रुचि रखते वाले पाठको के लिए यह पुस्तक निस्सदेह अत्यन्त उपयोगी है ॥ उन्हें इस विषय का दिशद हवन होना मो आवश्यक नहीं है । अपने दारे में जुनकारी का लाभ उठाकर थे अपने ध्येय को प्राप्ति बर सकते हैं और उत्तति के उच्चतम शिवर तक पहुचने मे सफल हो सबते हैं ॥

इसमें सायन सूर्य के सचार के अनुसार प्रेगोरियन कलैडर दर्ष के बारह मासो को प्रचक्त की बारह राशियों में विभजित शिया गया है। यथा जनवरी-मरूर, फरवरी-कुम्भ, मार्च-मीन, अपैल-मेद, मई-बुष, जून-मिथुद, जुलाई-कक, अगस्त- पिह, छिठम्दर-कन्पा, अक्तूदर-तुसा, सवम्दर-वृश्चिक ठप दिसम्दर-धनु ॥

एक द्विलचस्प बात यह है कि सायन सूर्द मास को पहलो तारीख को नहीं, बल्कि 2॥ तवारीथ को अथवा उसके आस-पास एक दाशि से दूसरी राशि मे सदार करता है| प्रारम्भ के सात दिद राशिसधि के होते हैं जिसमे पूर्व॑ेवर्ती और नहें, दोनों राधिया प्रभावी रहती हैं, पूर्दवर्ती राशि का प्रभाव उत्तरोत्तर अयता जाता है, नई राशि का ददतर जाता है । नई राशि 28 तारीख के आस- पास पूर्णे प्रभाव में आ प्राती है। और अगले मास की 20 तारीख तर पूर्ण अभावी रहती है उल्लेखवीय है कि शक (सोर) सम्बत्‌ शा मासारम्भ भी प्रेपोदियन मास की 22 तारीख को मदवा उसके आसपास होता है ॥

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