अग्नि पुराण PDF: श्री महर्षि वेदव्यास द्वारा मुफ्त हिंदी पीडीऍफ़ पुस्तक – पुराण | Agni Puran PDF : by Shree Maharshi Vedvyas Free Hindi PDF Book (Puran)

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लेखक श्री महर्षि वेदव्यास – shree Maharshi Vedvyas
Book Languageहिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ 24 MB
कुल पृष्ठ 881
श्रेणी धार्मिक / Religious , हिंदू / Hinduism

पहला अध्याय | मङ्गलाचरण तथा अग्नि और वसिष्ठके संवाद-रूपसे अग्निपुराणका आरम्भ भियं सरस्वती गौरी गणेशं स्कन्दमीश्वरम्। तथा पैल आदि ऋषि बदरिकाश्रमको गये और ब्रह्माणं वहिमिन्द्रादीन् वासुदेवं नमाम्यहम्॥ वहाँ व्यासजीको नमस्कार करके हमने प्रस’लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, किया।

तब उन्होंने हमें सारतत्वका उपदेश देना | महादेवजी, ब्रह्मा, अग्नि, इन्द्र आदि देवताओं तथा | आरम्भ किया ॥ ४-६॥ भगवान् वासुदेवको मैं नमस्कार करता हूँ॥ १॥

|व्यासजी बोले-सूत! तुम शुक आदिकेनैमिषारण्यकी बात है। शौनक आदि ऋषि | साथ सुनो। एक समय मुनियों के साथ मैंने महर्षि यज्ञों द्वारा भगवान् विष्णुका वजन कर रहे थे। |

वसिष्ठजीसे सारभूत परात्पर ब्रह्मके विषयमें पूछ। | उस समय वहाँ तीर्थयात्राके प्रसङ्गसे सूतजी | था। उस समय उन्होंने मुझे जैसा उपदेश दिया पधारे। महर्षियोंने उनका स्वागत-सत्कार करके | था, वही तुम्हें बतला रहा हूँ॥७॥ कहा- ॥ २ ॥

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| | वसिष्ठजीने कहा-व्यास ! सर्वान्तर्यामी ब्रह्मके ऋषि बोले-सूतजी! आप हमारी पूजा | दो स्वरूप हैं। मैं उन्हें बताता है सुनो। स्वीकार करके हमें वह सारसे भी सारभूत तत्त्व | पूर्वकालमें ऋषि-मुनि तथा देवतासहित मुझसे बतलाने की कृपा करें, जिसके जान लेनेमात्रसे | अग्निदेवने इस विषयमें जैसा, जो कुछ भी कहा सर्वज्ञता प्राप्त होती है ॥ ३ ॥
था, वहीं मैं तुम्हें बता रहा हैं)।

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पुस्तक स्रोत

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